परिचय
पर्यावरणीय कानून और अभिसमय (conventions) BPSC पर्यावरण पाठ्यक्रम का एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। यह उप-विषय उस वैधानिक ढाँचे को कवर करता है जिसके माध्यम से भारत अपने प्राकृतिक संसाधनों—वायु, जल, वन, वन्यजीव और आर्द्रभूमि (wetlands)—की रक्षा करता है, साथ ही उन अंतरराष्ट्रीय संधियों और समझौतों को भी जिन पर भारत ने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता की हानि और प्रदूषण जैसी सीमा-पार पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए हस्ताक्षर किए हैं। बिहार-विशिष्ट अभ्यर्थी के लिए इन कानूनों को समझना दोहरे रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में गंगा नदी डॉल्फिन (भारत का राष्ट्रीय जलीय प्राणी) और कंवर झील (एक रामसर स्थल) जैसी पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण संपदाएँ हैं, जो दोनों ही पिछली BPSC परीक्षाओं में प्रत्यक्ष रूप से पूछी जा चुकी हैं।
दिए गए सात PYQ के विश्लेषण से एक स्पष्ट प्रतिमान (pattern) उभरता है: BPSC तथ्यात्मक स्मरण की परीक्षा लेता है—किसी ऐतिहासिक कानून के अधिनियमन का वर्ष, जिस अनुसूची (schedule) के तहत किसी प्रजाति को संरक्षण प्राप्त है, वह विशिष्ट विधान जिसने किसी संस्था का सृजन किया, और किसी अंतरराष्ट्रीय अभिसमय का मूल उद्देश्य। ये प्रश्न विश्लेषणात्मक प्रकृति के नहीं हैं; वे सटीक स्मृति और निकटवर्ती विधिक उपकरणों के बीच अंतर करने की क्षमता को पुरस्कृत करते हैं। साथ ही, परीक्षा विशिष्ट कानूनों को वास्तविक-विश्व की घटनाओं से जोड़ने से नहीं कतराती—उदाहरण के लिए, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 को भोपाल गैस त्रासदी (1984) से जोड़ना, या राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 को त्वरित पर्यावरणीय न्याय की आवश्यकता से जोड़ना।
अपेक्षित गहराई मध्यम किंतु सटीक है। आपसे सावधानी सिद्धांत (Precautionary Principle) बनाम प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle) के गुणों की एक अनुच्छेद में तुलना करने के लिए नहीं कहा जाता; बल्कि आपको यह जानना होगा कि किस अधिनियम ने NGT का सृजन किया, कौन-सा अभिसमय आर्द्रभूमि से संबंधित है, और कौन-सी अनुसूची गंगा डॉल्फिन को उच्चतम संरक्षण देती है। कठिनाई तिथियों, अनुसूची संख्याओं और नामकरण के घनत्व में निहित है जिन्हें आसानी से भ्रमित किया जा सकता है।
इस अध्याय के अंत तक, आप:
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972, जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974, वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, और राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के बीच अंतर कर सकेंगे।
- वन्यजीव अधिनियम की चार अनुसूचियों को याद रख सकेंगे और यह भी कि कौन-सी लुप्तप्राय प्रजाति किस अनुसूची में आती है।
- रामसर अभिसमय, पेरिस समझौता, UNFCCC और अन्य प्रमुख अभिसमयों के दायरे और उद्देश्य को समझ सकेंगे।
- संस्थागत तंत्र—NGT, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड—को उनके मूल विधानों से जोड़ सकेंगे।
- इस ज्ञान को उन प्रत्यक्ष प्रश्नों को हल करने में लागू कर सकेंगे जो कई बार पूछे जा चुके हैं, और उन विविधताओं का पूर्वानुमान लगा सकेंगे जिन्हें BPSC परीक्षक भविष्य के प्रश्नपत्रों में प्रयोग कर सकता है।
मूल अवधारणाएँ एवं आधार
BPSC पर्यावरण खंड में हर विधिक और अभिसमय-आधारित प्रश्न कुछ मूल अवधारणाओं पर टिका होता है। इन्हें आत्मसात कर लें, और आप न केवल PYQ का आत्मविश्वास से उत्तर दे पाएंगे बल्कि परीक्षक द्वारा फेंकी गई किसी भी पार्श्व विस्तार (lateral extension) को भी संभाल पाएंगे।
मुख्य शब्दों की परिभाषाएँ
पर्यावरण (Environment): पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 2(a) के अंतर्गत परिभाषित, इसमें जल, वायु, भूमि और जल, वायु, भूमि तथा मनुष्यों, अन्य जीवित प्राणियों, पौधों, सूक्ष्मजीवों एवं संपत्ति के बीच विद्यमान अंतर्संबंध शामिल हैं। यह व्यापक परिभाषा अधिनियम को पर्यावरणीय क्षरण के सभी संभावित पहलुओं को कवर करने की अनुमति देती है।
प्रदूषण (Pollution): पर्यावरण में किसी ऐसे पदार्थ या ऊर्जा की उपस्थिति या प्रवेश जिसका हानिकारक या अप्रिय प्रभाव हो। भारतीय पर्यावरण कानून जल प्रदूषण (जल अधिनियम, 1974 द्वारा कवर), वायु प्रदूषण (वायु अधिनियम, 1981), और सामान्य पर्यावरणीय प्रदूषण (EPA, 1986) के बीच अंतर करता है। "हानिकारक" की सीमा निर्धारित मानकों द्वारा तय होती है।
पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem): परस्पर क्रिया करने वाले जीवों और उनके भौतिक पर्यावरण का एक जैविक समुदाय। जैव विविधता अभिसमय (CBD) इसे "पौधों, जंतुओं और सूक्ष्मजीव समुदायों तथा उनके निर्जीव पर्यावरण का एक गतिशील परिसर जो एक क्रियात्मक इकाई के रूप में परस्पर क्रिया करता है" के रूप में परिभाषित करता है। भारतीय कानून पारिस्थितिकी तंत्रों की रक्षा अप्रत्यक्ष रूप से आवास-विशिष्ट प्रावधानों (जैसे रामसर के तहत आर्द्रभूमि, वन संरक्षण अधिनियम के तहत वन) के माध्यम से करते हैं।
जैव विविधता (Biodiversity): विश्व में या किसी विशेष आवास में पौधों और जंतुओं के जीवन की विविधता, जिसे तीन स्तरों—आनुवंशिक, प्रजाति और पारिस्थितिकी तंत्र विविधता—पर माना जाता है। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और जैविक विविधता अधिनियम, 2002 जैव विविधता की रक्षा करने वाले दो मुख्य घरेलू कानून हैं। CBD के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएँ भारत को राष्ट्रीय जैव विविधता कार्य योजनाएँ तैयार करने के लिए बाध्य करती हैं।
सतत विकास (Sustainable Development): ऐसा विकास जो भविष्य की पीढ़ियों की अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता से समझौता किए बिना वर्तमान की आवश्यकताओं को पूरा करता है। यह सिद्धांत राष्ट्रीय हरित अधिकरण की न्यायशास्त्रीय नींव है और इसे पेरिस समझौते (प्रस्तावना की भाषा में) में स्पष्ट रूप से उद्धृत किया गया है। भारत में, सर्वोच्च न्यायालय ने वेल्लोर सिटिजन्स वेलफेयर फोरम बनाम भारत संघ (1996) जैसे मामलों के माध्यम से सतत विकास को अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) में पढ़ा है।
सावधानी सिद्धांत (Precautionary Principle): जहाँ गंभीर या अपूरणीय क्षति की आशंका हो, वहाँ पूर्ण वैज्ञानिक निश्चितता की कमी को पर्यावरणीय क्षरण को रोकने के लिए लागत-प्रभावी उपायों को टालने के कारण के रूप में उपयोग नहीं किया जाएगा। यह सिद्धांत राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 (धारा 20) द्वारा स्पष्ट रूप से शामिल किया गया था और NGT द्वारा कई निर्णयों में लागू किया गया है।
प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle): पर्यावरण को हुई क्षति के लिए मुआवजा देने और उपचारात्मक कार्रवाई की लागत वहन करने की प्रदूषक की पूर्ण देयता। सर्वोच्च न्यायालय ने एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ (1987) में खतरनाक गतिविधियों में संलग्न उद्यमों के लिए "पूर्ण देयता" का नियम निर्धारित किया, और NGT अधिनियम (धारा 20) भी इस सिद्धांत को अनिवार्य करता है।
लोक न्यास सिद्धांत (Public Trust Doctrine): कुछ प्राकृतिक संसाधन (वायु, जल, वन, वन्यजीव) सरकार द्वारा जनता के लिए न्यास (trust) के रूप में रखे जाते हैं, और सरकार उन्हें ऐसे ढंग से पराया नहीं कर सकती जिससे लोकहित को हानि पहुँचे। इस सिद्धांत का उपयोग भारतीय अदालतों द्वारा वनों, नदियों और तटीय क्षेत्रों की रक्षा के लिए किया गया है।
भारत में पर्यावरणीय कानून का संवैधानिक आधार
भारतीय संविधान में मूल रूप से स्पष्ट पर्यावरणीय प्रावधान नहीं थे। स्टॉकहोम मानव पर्यावरण सम्मेलन (1972) के बाद, भारत ने संविधान में संशोधन कर अनुच्छेद 48A (नीति निदेशक तत्व) और अनुच्छेद 51A(g) (मौलिक कर्तव्य) जोड़े। 42वाँ संशोधन अधिनियम, 1976 ने दोनों को जोड़ा।
- अनुच्छेद 48A: राज्य पर्यावरण की रक्षा और सुधार करने तथा देश के वनों एवं वन्यजीवों की सुरक्षा का प्रयास करेगा।
- अनुच्छेद 51A(g): वनों, झीलों, नदियों और वन्यजीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार करना, तथा जीवित प्राणियों के प्रति दया भाव रखना भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य होगा।
हालाँकि नीति निदेशक तत्व स्वयं में प्रवर्तनीय नहीं हैं, सर्वोच्च न्यायालय ने इन अनुच्छेदों को अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) के साथ पढ़कर जीवन के मौलिक अधिकार के भाग के रूप में स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार का सृजन किया है। इस न्यायिक नवाचार ने भारत के अधिकांश पर्यावरणीय न्यायशास्त्र को गति दी है।
विधिक उपकरणों के प्रकार
आपको निम्नलिखित के बीच पदानुक्रम और अंतर समझना चाहिए:
| उपकरण | विवरण | उदाहरण |
|---|---|---|
| अधिनियम (Act) | संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा पारित कानून। कानूनी अधिकार, कर्तव्य और दंड का सृजन करता है। | वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 |
| नियम (Rule) | किसी अधिनियम के प्रावधानों को क्रियान्वित करने हेतु उसके तहत तैयार प्रत्यायोजित विधान। नियमों में कानून का बल होता है परंतु ये मूल अधिनियम से आगे नहीं जा सकते। | वन्यजीव (संरक्षण) नियम, 1995 |
| अभिसमय (Convention) | अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत राज्यों के बीच एक बाध्यकारी समझौता। अनुसमर्थन (ratification) पर यह राज्य के लिए दायित्व सृजित करता है। | रामसर अभिसमय (1971) |
| संधि (Treaty) | राज्यों के बीच एक औपचारिक, कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता। प्रायः अभिसमय के पर्याय के रूप में प्रयुक्त। | पेरिस समझौता (2015) (तकनीकी रूप से UNFCCC के तहत एक संधि) |
| प्रोटोकॉल (Protocol) | किसी अभिसमय के लिए पूरक समझौता जो नई प्रतिबद्धताएँ जोड़ता है। | क्योटो प्रोटोकॉल (1997), UNFCCC के लिए; मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987), वियना अभिसमय के लिए |
भारत में प्रमुख पर्यावरणीय कानून: एक कालानुक्रमिक गहन अध्ययन
यह खंड पाँच सर्वाधिक परीक्षित घरेलू कानूनों को कवर करता है। प्रत्येक कानून को प्रथम सिद्धांतों से समझाया गया है, उन विशिष्ट विवरणों पर विशेष ध्यान देते हुए जो BPSC PYQ में सामने आए हैं।
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972
9 सितंबर 1972 को अधिनियमित, यह वन्यजीव संरक्षण के प्रति समर्पित भारत का पहला व्यापक कानून था। इससे पहले, वन्यजीव संरक्षण खंडित रूप में था (जैसे, वन्य पक्षी और पशु संरक्षण अधिनियम, 1912)। यह अधिनियम स्टॉकहोम सम्मेलन के समान वर्ष में पारित हुआ, जिसने वैश्विक पर्यावरणीय चेतना को उत्प्रेरित किया।
अधिनियम की संरचना:
- यह छह अनुसूचियाँ (I से VI) बनाता है जो वन्य पशुओं, पक्षियों और पौधों को संरक्षण की मात्रा के आधार पर वर्गीकृत करती हैं। अनुसूची I और II पूर्ण संरक्षण प्रदान करती हैं; इन अनुसूचियों के तहत अपराध उच्चतम दंड को आकर्षित करते हैं।
- अनुसूची I (BPSC में गंगा नदी डॉल्फिन के लिए पूछी गई): बाघ, भारतीय हाथी, गैंडा, हिम तेंदुआ और गंगा डॉल्फिन जैसी लुप्तप्राय प्रजातियाँ शामिल हैं। इन प्रजातियों का शिकार विशेष परिस्थितियों (जैसे अनुमति सहित वैज्ञानिक शोध) को छोड़कर पूर्णतः निषिद्ध है।
- अनुसूची II: वे प्रजातियाँ जिन्हें उच्च स्तर का संरक्षण चाहिए परंतु कुछ अपवादों के साथ (जैसे कुछ प्रयोजनों के लिए लाइसेंस सहित शिकार की अनुमति)। इसमें भारतीय जंगली गधा, काला हिरण और महान भारतीय सोन चिड़िया जैसे पशु शामिल हैं।
- अनुसूची III एवं IV: वे प्रजातियाँ जो लुप्तप्राय नहीं हैं परंतु फिर भी शिकार और व्यापार से संरक्षण की आवश्यकता रखती हैं। इसमें चीतल (धब्बेदार हिरण), सांभर और सामान्य पक्षी शामिल हैं।
- अनुसूची V: हानिकारक जीव (Vermin)—वे पशु जिनका बिना किसी प्रतिबंध के शिकार किया जा सकता है। इसमें चूहे और आम कौवे शामिल हैं। 2016 में, केंद्र सरकार ने बिहार में कटाई की अनुमति देने के लिए नीलगाय (ब्लू बुल) को हानिकारक जीव घोषित किया।
- अनुसूची VI: संरक्षित पौधे (1991 संशोधन में जोड़े गए)। इसमें बेडोम साइकैड और ब्लू वंदा (एक ऑर्किड) जैसी प्रजातियाँ शामिल हैं।
गंगा नदी डॉल्फिन (Platanista gangetica): गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना नदी प्रणालियों में पाई जाने वाली, यह वन्यजीव अधिनियम की अनुसूची I में सूचीबद्ध है, जिससे इसका शिकार या पकड़ना एक गैर-जमानती अपराध बन जाता है जिसमें न्यूनतम तीन वर्ष का कारावास है। इसे भारत का राष्ट्रीय जलीय प्राणी (2009) भी घोषित किया गया है। बिहार में, यह भागलपुर के विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य के निकट गंगा में पाई जाती है।
मुख्य संशोधन:
- 1991: अनुसूची VI (पौधे) जोड़ी गई, दंड को कठोर किया गया।
- 2002: स्थानीय समुदायों को शामिल करने के लिए सामुदायिक रिजर्व और संरक्षण रिजर्व की अवधारणा शुरू की गई।
- 2006: धारा 38-O के तहत राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) का सृजन किया गया।
दंड: अनुसूची I के अपराधों के लिए सात वर्ष तक का कारावास और जुर्माना। अनुसूची II के लिए तीन वर्ष तक। यह अधिनियम शिकार, आवास को क्षति पहुँचाने, और ट्रॉफी तथा पशु वस्तुओं के व्यापार को भी निषिद्ध करता है।
जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974
23 मार्च 1974 को अधिनियमित, यह जल प्रदूषण को विशेष रूप से लक्षित करने वाला भारत का पहला कानून था। यह संविधान के अनुच्छेद 252 (दो या अधिक राज्यों के संकल्प) के अंतर्गत पारित हुआ क्योंकि जल एक राज्य विषय है। मूलतः 12 राज्यों द्वारा अपनाया गया, इसे बाद में सभी संघ राज्य क्षेत्रों तक विस्तारित किया गया और अंततः सभी राज्यों द्वारा अपनाया गया।
मुख्य संस्थाएँ:
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB): राष्ट्रीय मानक निर्धारित करता है, गतिविधियों का समन्वय करता है, और केंद्र सरकार को सलाह देता है।
- राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB): राज्य स्तर पर अधिनियम को क्रियान्वित करते हैं, निर्वहन के लिए सहमति देते हैं, और अपराधियों पर मुकदमा चलाते हैं।
अपराध:
- किसी भी विषैले, हानिकारक या प्रदूषणकारी पदार्थ को किसी धारा या कुएँ में प्रवेश करने देना।
- दंड: छह वर्ष तक का कारावास और/या जुर्माना।
महत्वपूर्ण अंतर: यह अधिनियम भूजल प्रदूषण को व्यापक रूप से कवर नहीं करता; इसे पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत कवर किया गया है। जल अधिनियम ने बहिस्राव (effluent) निर्वहन करने वाले उद्योगों के लिए स्थापना हेतु सहमति (consent to establish) और संचालन हेतु सहमति (consent to operate) की अवधारणा भी स्थापित की।
वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981
29 मार्च 1981 को अधिनियमित, यह कानून स्टॉकहोम सम्मेलन के निर्णयों को लागू करने और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पारित किया गया था। भोपाल गैस त्रासदी (1984) ने बाद में औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण में कमियों को उजागर किया, जिसके कारण व्यापक EPA आया।
मुख्य विशेषताएँ:
- CPCB और SPCB इस अधिनियम को भी लागू करते हैं (जल अधिनियम जैसा ही संस्थागत तंत्र)।
- इस अधिनियम के तहत वाहनों और उद्योगों के लिए उत्सर्जन मानक निर्धारित किए गए हैं।
- अपराध: निर्धारित मानकों से अधिक वायु प्रदूषकों का उत्सर्जन। दंड: छह वर्ष तक का कारावास और/या जुर्माना।
BPSC के लिए महत्वपूर्ण: वायु अधिनियम को 1987 में संशोधित कर ध्वनि प्रदूषण को वायु प्रदूषण के एक रूप के रूप में शामिल किया गया। यह एक सामान्य भ्रम है—कई अभ्यर्थी सोचते हैं कि ध्वनि एक अलग कानून के तहत कवर होती है, परंतु यह वायु अधिनियम की "वायु प्रदूषक" की परिभाषा (वायुमंडल में उपस्थित कोई भी वस्तु जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो) के अंतर्गत आती है।
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 (EPA)
23 मई 1986 को अधिनियमित और 19 नवंबर 1986 को लागू हुआ, यह भारत में पर्यावरण संरक्षण के लिए छत्र विधान है। इसका अधिनियमन भोपाल गैस त्रासदी (दिसंबर 1984) की प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया थी, जिसने उजागर किया कि मौजूदा क्षेत्रीय कानून (जल अधिनियम, वायु अधिनियम) जल, वायु और मृदा संदूषण से जुड़ी बहु-माध्यम आपदा को संभालने के लिए अपर्याप्त थे।
मुख्य प्रावधान:
- धारा 3(1): केंद्र सरकार पर्यावरण की रक्षा और सुधार के लिए उपाय कर सकती है, जिसमें उत्सर्जन, बहिस्राव और अपशिष्ट के लिए मानक निर्धारित करना शामिल है।
- धारा 5: सरकार किसी उद्योग या प्रक्रिया को बंद करने, प्रतिबंधित करने या विनियमित करने के लिए निर्देश जारी कर सकती है।
- धारा 7: खतरनाक पदार्थों को संभालने वाला कोई भी व्यक्ति उन्हें निर्धारित मानकों से अधिक मात्रा में निर्वहित नहीं करेगा।
- धारा 15: उल्लंघन के लिए दंड—पाँच वर्ष तक का कारावास और/या जुर्माना। निरंतर अपराधों के लिए, प्रतिदिन ₹5,000 तक का अतिरिक्त जुर्माना।
- धारा 16: कंपनियों द्वारा अपराध—अपराध के समय व्यवसाय का प्रभारी व्यक्ति दोषी माना जाता है जब तक कि वह उचित तत्परता सिद्ध न कर दे।
EPA सरकार को यह अधिकार भी देता है कि वह:
- पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) के लिए नियम बनाए (EIA अधिसूचना, 1994, बाद में 2006)।
- पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (जैसे पश्चिमी घाट, तटीय क्षेत्र) को अधिसूचित करे।
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना करे (यद्यपि NGT का अपना अधिनियम है, EPA ने ऐसी संस्था के लिए मूल सक्षमकारी प्रावधान दिया)।
तीन मूल प्रदूषण नियंत्रण कानूनों की तुलना:
| विशेषता | जल अधिनियम, 1974 | वायु अधिनियम, 1981 | पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 |
|---|---|---|---|
| दायरा | केवल जल निकाय | केवल वायु | सभी पर्यावरणीय माध्यम (वायु, जल, भूमि, ध्वनि) |
| प्रवर्तन | CPCB व SPCB | CPCB व SPCB | केंद्र सरकार (प्रत्यायोजित रूप से CPCB/SPCB के माध्यम से) |
| अधिकतम दंड | 6 वर्ष + जुर्माना | 6 वर्ष + जुर्माना | 5 वर्ष + जुर्माना (या ₹1 लाख) + दैनिक जुर्माना |
| अधिनियमन वर्ष | 1974 | 1981 | 1986 (भोपाल के बाद) |
| संवैधानिक आधार | अनुच्छेद 252 (राज्य सहमति) | अनुच्छेद 253 (अंतरराष्ट्रीय समझौतों का क्रियान्वयन) | अनुच्छेद 253 (अवशिष्ट शक्ति) |
राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010
NGT की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 (अधिनियम संख्या 19, 2010) के तहत 18 अक्टूबर 2010 को हुई। यह विशिष्ट विधान है जिसने अधिकरण का सृजन किया, न कि EPA। यह तथ्य दिए गए PYQ में दो बार पूछा गया, जो इसके उच्च महत्व को दर्शाता है।
NGT का सृजन क्यों किया गया? 2010 से पहले, पर्यावरणीय विवाद सिविल न्यायालयों और उच्च न्यायालयों द्वारा सुने जाते थे, जिससे विलंब और तकनीकी विशेषज्ञता की कमी होती थी। NGT को एक विशेष मंच के रूप में डिज़ाइन किया गया था जिसमें:
- त्वरित निपटान (मामलों को 6 महीने में हल किया जाना है, जिसे 6 महीने और बढ़ाया जा सकता है)।
- विशेषज्ञ सदस्य (न्यायिक और तकनीकी दोनों सदस्य पर्यावरण विज्ञान की पृष्ठभूमि के साथ)।
- CPCB, SPCB और विभिन्न सहमति आदेशों के आदेशों पर अपीलीय क्षेत्राधिकार।
संरचना:
- एक अध्यक्ष (सर्वोच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश या किसी उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश)।
- 10 से 20 के बीच न्यायिक सदस्य (सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश)।
- 10 से 20 के बीच विशेषज्ञ सदस्य (पर्यावरण विज्ञान या इंजीनियरिंग में डिग्री और 15 वर्षों के अनुभव के साथ)।
क्षेत्राधिकार:
- सभी सिविल मामलों पर मूल क्षेत्राधिकार जहाँ पर्यावरण से संबंधित कोई सारवान प्रश्न उठता हो, जिसमें जल अधिनियम, वायु अधिनियम, EPA, वन्यजीव अधिनियम और वन संरक्षण अधिनियम के तहत कानूनी अधिकारों का प्रवर्तन शामिल है।
- उपरोक्त अधिनियमों के तहत अपीलीय प्राधिकरणों द्वारा पारित आदेशों पर अपीलीय क्षेत्राधिकार।
- कोई आपराधिक क्षेत्राधिकार नहीं—पर्यावरणीय कानूनों के तहत आपराधिक अपराधों की सुनवाई अभी भी आपराधिक न्यायालयों द्वारा की जाती है।
लागू सिद्धांत (धारा 20): NGT आदेश पारित करते समय सावधानी सिद्धांत और प्रदूषक भुगतान सिद्धांत को लागू करेगा। यह अधिनियम में स्पष्ट रूप से बताया गया है।
दंडात्मक शक्ति: NGT के पास सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत एक सिविल न्यायालय की समान शक्तियाँ हैं, और यह अवमानना के लिए दंड लगा सकता है।
BPSC के लिए महत्वपूर्ण: NGT अधिनियम EPA में संशोधन नहीं है। यह एक स्वतंत्र अधिनियम है। EPA सरकार को अधिकरण गठित करने का अधिकार देता है (धारा 3(2)(v)), परंतु NGT का सृजन एक अलग, विशिष्ट अधिनियम के तहत हुआ।
अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय अभिसमय: गहन अध्ययन
भारत कई अंतरराष्ट्रीय अभिसमयों का पक्षकार है। BPSC के लिए, सर्वाधिक परीक्षित रामसर अभिसमय और पेरिस समझौता हैं। हालाँकि, एक गहन अभ्यर्थी को UNFCCC, CBD, CITES और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के बारे में भी जानना चाहिए क्योंकि ये पार्श्व विस्तार प्रश्नों में अक्सर सामने आते हैं।
रामसर अभिसमय (1971)
पूरा नाम: जलपक्षी आवास के रूप में विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों पर अभिसमय। रामसर, ईरान में 1971 में हस्ताक्षरित और 1975 में लागू हुआ। भारत एक हस्ताक्षरकर्ता है (1982 में अनुसमर्थित)।
उद्देश्य: स्थानीय, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय कार्यों तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से सभी आर्द्रभूमियों का संरक्षण और बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग, सतत विकास प्राप्त करने में योगदान के रूप में।
मुख्य विशेषताएँ:
- रामसर सूची: पक्षकार उन आर्द्रभूमियों को नामित करते हैं जो विशिष्ट मानदंडों (जैसे दुर्लभ प्रजातियों को सहारा देना, जलपक्षी समागम, प्रतिनिधि या अद्वितीय आर्द्रभूमियाँ) को पूरा करती हैं।
- मोंत्रो रिकॉर्ड (Montreux Record): रामसर स्थलों का एक रजिस्टर जहाँ पारिस्थितिक चरित्र में परिवर्तन हुआ है, हो रहा है, या होने की संभावना है। भारत के पास इस रिकॉर्ड में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान और चिल्का झील थे; पुनर्स्थापन के बाद चिल्का को हटा दिया गया।
- 2024 में भारत: (दिसंबर 2024 तक) 80 रामसर स्थल हैं, जो दक्षिण एशिया में सर्वाधिक हैं। बिहार की कंवर झील (जिसे कबरताल भी कहा जाता है) को 2020 में रामसर स्थल घोषित किया गया। यह बेगूसराय जिले में एक मीठे पानी की गोखुर (oxbow) झील है और प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण आवास है।
अभिसमय के तीन स्तंभ:
- रामसर स्थलों का नामांकन।
- सभी आर्द्रभूमियों का बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग।
मुख्य अंतर्दृष्टि: रामसर अभिसमय मत्स्य पालन, शिकार या जल निष्कर्षण को सीधे विनियमित नहीं करता। यह पक्षकारों को आर्द्रभूमियों के "बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग" को बढ़ावा देने के लिए योजना तैयार करने और लागू करने के लिए बाध्य करता है। "बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग" शब्द को "आर्द्रभूमियों के पारिस्थितिक चरित्र का रखरखाव" के रूप में परिभाषित किया गया है।
पेरिस समझौता (2015)
पेरिस में COP21 में 12 दिसंबर 2015 को संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन ढाँचा अभिसमय (UNFCCC) के अंतर्गत अपनाया गया, और 4 नवंबर 2016 को लागू हुआ। भारत ने इसे 2 अक्टूबर 2016 को अनुसमर्थित किया।
मूल उद्देश्य (अनुच्छेद 2):
- वैश्विक औसत तापमान में वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2°C से काफी नीचे रखना।
- तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.5°C तक सीमित करने के प्रयासों का पीछा करना।
- जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों के अनुकूलन की क्षमता बढ़ाना और जलवायु लचीलापन (resilience) को बढ़ावा देना।
- वित्त प्रवाह को कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और जलवायु-लचीले विकास के मार्ग के अनुरूप बनाना।
मुख्य तंत्र: राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) प्रत्येक पक्षकार को क्रमिक NDC तैयार करने, संप्रेषित करने और बनाए रखने चाहिए जो पिछले से आगे की प्रगति दर्शाते हों। भारत के पहले NDC (2015) में शामिल था:
- 2030 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 33-35% की कमी (2005 के स्तर से)।
- 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से 40% संचयी विद्युत क्षमता प्राप्त करना।
- अतिरिक्त वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से 2.5–3 बिलियन टन CO2 समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाना।
विभेदीकरण: यह समझौता "साझा किंतु विभेदित उत्तरदायित्व और संबंधित क्षमताएँ (CBDR-RC)" के सिद्धांत पर आधारित है, जो विभिन्न राष्ट्रीय परिस्थितियों के आलोक में है। विकसित देशों से उत्सर्जन में कमी में अग्रणी भूमिका निभाने और विकासशील देशों को वित्तीय व तकनीकी सहायता प्रदान करने की अपेक्षा की जाती है।
अन्य जलवायु उपकरणों के साथ पेरिस समझौते की तुलना:
| उपकरण | वर्ष | उद्देश्य | बाध्यकारी प्रकृति | भारत की स्थिति |
|---|---|---|---|---|
| UNFCCC | 1992 | ग्रीनहाउस गैस सांद्रता को स्थिर करना | ढाँचा अभिसमय (गैर-बाध्यकारी लक्ष्य) | हस्ताक्षरित एवं अनुसमर्थित |
| क्योटो प्रोटोकॉल | 1997 | अनुबंध-I (विकसित) देशों के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी उत्सर्जन कमी लक्ष्य | केवल विकसित देशों के लिए बाध्यकारी | कमी करना आवश्यक नहीं (गैर-अनुबंध-I) |
| पेरिस समझौता | 2015 | वार्मिंग को 2°C से काफी नीचे सीमित करना, 1.5°C का प्रयास करना | राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान बाध्यकारी हैं (परंतु लक्ष्य राष्ट्रीय रूप से निर्धारित) | अनुसमर्थित, NDC प्रस्तुत |
सामान्य भूल: पेरिस समझौता "2030 तक सभी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को समाप्त करना" लक्ष्य नहीं रखता। यह एक गलत निरूपण है। लक्ष्य सदी के मध्य तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन है (विकसित देशों के लिए लगभग 2050, और भारत के COP26 में अद्यतन प्रतिज्ञा के अनुसार 2070)। 1.5°C का लक्ष्य तापमान सीमा है, उत्सर्जन समाप्ति की अंतिम तिथि नहीं।
जानने योग्य अन्य अभिसमय (पार्श्व विस्तार के लिए)
- CITES (लुप्तप्राय वन्य जीव-जंतु और वनस्पति की प्रजातियों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय), 1973: लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को विनियमित करता है। भारत एक पक्षकार है। गंगा डॉल्फिन परिशिष्ट I में सूचीबद्ध है (सर्वाधिक लुप्तप्राय—व्यावसायिक व्यापार निषिद्ध)।
- जैव विविधता अभिसमय (CBD), 1992: तीन उद्देश्य—जैव विविधता का संरक्षण, सतत उपयोग, और आनुवंशिक संसाधनों से लाभों का न्यायसंगत साझाकरण। भारत ने इसे लागू करने के लिए जैविक विविधता अधिनियम, 2002 अधिनियमित किया।
- ओज़ोन परत को क्षति पहुँचाने वाले पदार्थों पर मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल, 1987: ओज़ोन-क्षयकारी पदार्थों (CFC, हैलोन) के उत्पादन को समाप्त करता है। भारत ने इसे 1992 में अनुसमर्थित किया। किगाली संशोधन (2016) ने इसे HFC (शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें) को चरणबद्ध रूप से कम करने के लिए विस्तारित किया।
- समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCLOS), 1982: समुद्री पर्यावरण को नियंत्रित करता है। भारत ने हस्ताक्षर और अनुसमर्थन किया है। भाग XII समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा से संबंधित है।
हल किए गए उदाहरण एवं अनुप्रयोग
अब हम दिए गए PYQ में से पाँच को आवश्यक सटीक प्रारूप में हल करते हुए देखेंगे। इससे यह प्रदर्शित होगा कि गहन अध्ययन से प्राप्त ज्ञान को कैसे लागू किया जाए।
उदाहरण 1 — BPSC (वर्ष अज्ञात)
प्रश्न: भारत में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना किस अधिनियम के तहत की गई थी?
विद्यार्थियों ने देखे गए विकल्प:
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972
- जल (प्रदूषण निवारण) अधिनियम, 1974
समाधान चरण:
- प्रश्न क्या परख रहा है: NGT के लिए विशिष्ट सक्षमकारी विधान का ज्ञान। कई विद्यार्थी गलती से यह मान लेते हैं कि NGT का सृजन EPA के तहत हुआ क्योंकि EPA छत्र पर्यावरणीय कानून है, परंतु NGT का अपना अधिनियम है।
- प्रत्येक गलत विकल्प क्यों गलत है:
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986: यह अधिनियम सरकार को अधिकरण गठित करने की शक्ति देता है (धारा 3(2)(v)), परंतु NGT का वास्तविक सृजन एक अलग संसदीय अधिनियम द्वारा किया गया। EPA स्वयं NGT की स्थापना नहीं करता।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: यह अधिनियम विशेष रूप से वन्यजीव संरक्षण से संबंधित है और किसी अधिकरण का सृजन नहीं करता; यह राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की स्थापना करता है, परंतु NGT की नहीं।
- जल (प्रदूषण निवारण) अधिनियम, 1974: यह अधिनियम CPCB और SPCB का सृजन करता है, किसी अधिकरण का नहीं। इसके आदेशों की अपील NGT में की जाती है, परंतु अधिनियम स्वयं NGT की स्थापना नहीं करता।
- सही विकल्प क्यों सही है: राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 संसद द्वारा पारित हुआ और इसे 2 जून 2010 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली। इस अधिनियम की धारा 3 विशेष रूप से कहती है कि "केंद्र सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, राष्ट्रीय हरित अधिकरण नामक एक अधिकरण की स्थापना करेगी।" अतः, NGT इसी विशिष्ट अधिनियम के तहत स्थापित है।
सही उत्तर: राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010
मुख्य निष्कर्ष: जब किसी वैधानिक निकाय की सक्षमकारी विधान के बारे में पूछा जाए, तो उस अधिनियम को देखें जो उसके नाम को साझा करता हो। NGT अधिनियम, वन्यजीव अधिनियम, और EPA सभी अलग-अलग कानून हैं।
उदाहरण 2 — BPSC (वर्ष अज्ञात)
प्रश्न: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत, गंगा बेसिन में पाई जाने वाली गंगा नदी डॉल्फिन किस अनुसूची के तहत संरक्षित है?
विद्यार्थियों ने देखे गए विकल्प:
- अनुसूची I
- अनुसूची II
- अनुसूची III
- अनुसूची IV
समाधान चरण:
- प्रश्न क्या परख रहा है: वन्यजीव अधिनियम के भीतर अनुसूची प्रणाली और भारत के राष्ट्रीय जलीय प्राणी, गंगा डॉल्फिन के विशिष्ट स्थान का ज्ञान।
- प्रत्येक गलत विकल्प क्यों गलत है:
- अनुसूची II: इसमें ऐसे पशु शामिल हैं जो अत्यधिक संरक्षित हैं परंतु सर्वाधिक लुप्तप्राय नहीं। गंगा डॉल्फिन गंभीर रूप से लुप्तप्राय (IUCN रेड लिस्ट के अनुसार) है और इसलिए उच्चतम अनुसूची में है।
- अनुसूची III एवं IV: कम संरक्षण प्रदान करती हैं; इनमें हिरण, जंगली सूअर और सामान्य पक्षी जैसी प्रजातियाँ शामिल हैं—लुप्तप्राय जलीय स्तनधारी नहीं।
- सही विकल्प क्यों सही है: गंगा नदी डॉल्फिन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में सूचीबद्ध है। अनुसूची I पूर्ण संरक्षण प्रदान करती है, जिससे डॉल्फिन का शिकार या उसे चोट पहुँचाना एक गैर-जमानती अपराध बन जाता है जिसमें न्यूनतम तीन वर्ष का कारावास है, जिसे सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।
सही उत्तर: अनुसूची I
मुख्य निष्कर्ष: बिहार के लिए अनुसूची I प्रजातियों की सूची याद रखें: गंगा डॉल्फिन, बाघ और हाथी सभी अनुसूची I में हैं। किसी भी "सर्वाधिक लुप्तप्राय" प्रजाति के लिए, उत्तर अनुसूची I है।
उदाहरण 3 — BPSC (वर्ष अज्ञात)
प्रश्न: भोपाल गैस त्रासदी के बाद भारतीय संसद द्वारा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम किस वर्ष अधिनियमित किया गया?
विद्यार्थियों ने देखे गए विकल्प:
- 1986
- 1980
- 1991
- 1995
समाधान चरण:
- प्रश्न क्या परख रहा है: EPA के अधिनियमन वर्ष का प्रत्यक्ष तथ्यात्मक स्मरण और भोपाल गैस त्रासदी (1984) से इसके कारणात्मक संबंध का ज्ञान।
- प्रत्येक गलत विकल्प क्यों गलत है:
- 1980: वायु अधिनियम 1981 में अधिनियमित हुआ, EPA नहीं। 1980 भोपाल से पहले का वर्ष है।
- 1991: वन्यजीव अधिनियम में 1991 में संशोधन हुआ; EPA उस वर्ष अधिनियमित नहीं हुआ।
- 1995: 1995 में कोई प्रमुख पर्यावरणीय अधिनियम पारित नहीं हुआ; जैविक विविधता अधिनियम 2002 में आया।
- सही विकल्प क्यों सही है: पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 23 मई 1986 को पारित हुआ, और 19 नवंबर 1986 को लागू हुआ। यह दिसंबर 1984 की भोपाल आपदा की प्रत्यक्ष विधायी प्रतिक्रिया थी, जिसने मौजूदा कानूनों की अपर्याप्तता को उजागर किया।
सही उत्तर: 1986
मुख्य निष्कर्ष: प्रमुख पर्यावरणीय कानूनों को ऐतिहासिक घटनाओं से जोड़ें: 1972 (स्टॉकहोम सम्मेलन + वन्यजीव अधिनियम), 1986 (भोपाल + EPA), 2010 (NGT अधिनियम)।
उदाहरण 4 — BPSC (वर्ष अज्ञात)
प्रश्न: 'रामसर अभिसमय' एक अंतर-सरकारी संधि है जो किस पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए ढाँचा प्रदान करती है?
विद्यार्थियों ने देखे गए विकल्प:
- आर्द्रभूमि
- लुप्तप्राय प्रजातियाँ
- समुद्री जीवन
- वन
समाधान चरण:
- प्रश्न क्या परख रहा है: रामसर अभिसमय द्वारा कवर की जाने वाली विशिष्ट पारिस्थितिकी तंत्र की समझ। रामसर को CITES (लुप्तप्राय प्रजातियाँ) या CBD (जैव विविधता) के साथ भ्रमित करना आसान है।
- प्रत्येक गलत विकल्प क्यों गलत है:
- लुप्तप्राय प्रजातियाँ: यह CITES (1973) और वन्यजीव अधिनियम द्वारा कवर होता है।
- समुद्री जीवन: यह UNCLOS और CBD द्वारा कवर होता है, रामसर द्वारा नहीं। रामसर में तटीय आर्द्रभूमियाँ (जैसे मैंग्रोव, ज्वारनदमुख) शामिल हो सकती हैं, परंतु इसका प्राथमिक फोकस समस्त समुद्री जीवन नहीं, आर्द्रभूमियाँ हैं।
- वन: यह वन संरक्षण अधिनियम और विभिन्न वानिकी समझौतों (जैसे अंतरराष्ट्रीय उष्णकटिबंधीय लकड़ी समझौता) द्वारा कवर होता है, रामसर द्वारा नहीं।
- सही विकल्प क्यों सही है: रामसर अभिसमय का पूरा नाम "जलपक्षी आवास के रूप में विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों पर अभिसमय" है। इसका संपूर्ण ढाँचा आर्द्रभूमियों के संरक्षण और बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग के लिए समर्पित है। बिहार की कंवर झील एक रामसर स्थल है।
सही उत्तर: आर्द्रभूमि
मुख्य निष्कर्ष: अभिसमय का पूरा नाम हमेशा पढ़ें। "रामसर" = आर्द्रभूमि। "CITES" = लुप्तप्राय प्रजातियों में व्यापार। "UNFCCC" = जलवायु परिवर्तन।
उदाहरण 5 — BPSC (वर्ष अज्ञात)
प्रश्न: UNFCCC के तहत अपनाए गए पेरिस समझौते का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
विद्यार्थियों ने देखे गए विकल्प:
- वैश्विक तापमान वृद्धि को 2°C से काफी नीचे सीमित करना
- 2030 तक सभी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को समाप्त करना
- केवल विकसित देशों को तकनीक हस्तांतरित करना
- केवल ओज़ोन परत क्षय पर ध्यान केंद्रित करना
समाधान चरण:
- प्रश्न क्या परख रहा है: अनुच्छेद 2 में बताए गए पेरिस समझौते का मूल लक्ष्य। विद्यार्थियों को जलवायु परिवर्तन (पेरिस) और ओज़ोन क्षय (मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल) के बीच अंतर करना चाहिए।
- प्रत्येक गलत विकल्प क्यों गलत है:
- 2030 तक सभी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को समाप्त करना: यह एक अवास्तविक और गलत लक्ष्य है। पेरिस समझौता सदी के मध्य के आसपास शुद्ध-शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य रखता है, 2030 तक पूर्ण समाप्ति का नहीं।
- केवल विकसित देशों को तकनीक हस्तांतरित करना: यह समझौता विकासशील देशों को तकनीक हस्तांतरण को प्रोत्साहित करता है, न कि केवल विकसित देशों को। विकसित देशों से सहायता प्रदान करने की अपेक्षा है, परंतु हस्तांतरण विकसित से विकासशील की ओर बहता है।
- केवल ओज़ोन परत क्षय पर ध्यान केंद्रित करना: ओज़ोन क्षय मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का विषय है, पेरिस समझौते का नहीं।
- सही विकल्प क्यों सही है: पेरिस समझौते का अनुच्छेद 2 कहता है: "वैश्विक औसत तापमान में वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2°C से काफी नीचे रखना और तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.5°C तक सीमित करने के प्रयासों का पीछा करना।" यही प्राथमिक उद्देश्य है।
सही उत्तर: वैश्विक तापमान वृद्धि को 2°C से काफी नीचे सीमित करना
मुख्य निष्कर्ष: पेरिस समझौते के दो लक्ष्य हैं "2°C से काफी नीचे, 1.5°C का प्रयास"। इसे एक जोड़े के रूप में याद रखें। ध्यान दें कि केवल "नीचे" नहीं बल्कि "काफी नीचे" शब्द का प्रयोग किया गया है—यह समझौते में प्रयुक्त सटीक भाषा है।
PYQ रुझान एवं प्रतिमान
दिए गए सात PYQ पर्यावरणीय कानूनों और अभिसमयों के परीक्षण के तरीके में एक सुसंगत प्रतिमान प्रकट करते हैं। इस प्रतिमान को समझना आपकी तैयारी को धार देगा।
1. तथ्यात्मक सटीकता और विशिष्टता: सभी प्रश्न सटीक तथ्यात्मक स्मरण की माँग करते हैं—अधिनियमन के वर्ष (EPA के लिए 1986, वन्यजीव अधिनियम के लिए 1972), अनुसूची संख्याएँ (गंगा डॉल्फिन के लिए अनुसूची I), सटीक अधिनियम नाम (राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010, न कि EPA)। सातों में से किसी में भी व्याख्यात्मक या तुलनात्मक प्रश्न नहीं है। परीक्षक जानना चाहता है कौन-सा अधिनियम और कौन-सा वर्ष।
2. उच्च-महत्व वाले विषयों की बार-बार परख: राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम दो बार आता है (प्रश्न 1 और 4), जो दर्शाता है कि NGT एक "गर्म" विषय है। वन्यजीव अधिनियम की अनुसूची I भी एक बार-बार आने वाला प्रिय विषय है, विशेषकर जब इसे बिहार की अपनी गंगा डॉल्फिन से जोड़ा जाता है। अंतरराष्ट्रीय अभिसमयों को स्पष्ट, असंदिग्ध उद्देश्यों के साथ परखा जाता है (रामसर = आर्द्रभूमि, पेरिस = तापमान सीमा)।
3. भ्रामक विकल्प (Distractor) निर्माण: गलत विकल्प आमतौर पर अन्य सुप्रसिद्ध पर्यावरणीय अधिनियम या अभिसमय होते हैं जो प्रशंसनीय रूप से जुड़े हुए हैं परंतु सही उत्तर नहीं हैं। उदाहरण के लिए, यह पूछते हुए कि NGT किस अधिनियम के तहत स्थापित किया गया, भ्रामक विकल्पों में EPA (एक तार्किक परंतु गलत संबंध) और जल अधिनियम (एक प्रदूषण नियंत्रण कानून) शामिल हैं। इसी प्रकार, रामसर अभिसमय के लिए, भ्रामक विकल्प "लुप्तप्राय प्रजातियाँ" (CITES) और "वन" (वन संरक्षण अधिनियम) हैं। इसका अर्थ है कि आपको न केवल सही उत्तर जानना चाहिए बल्कि उसे निकटवर्ती अवधारणाओं से भी अलग करना चाहिए।
4. कठिनाई का प्रक्षेप पथ: निम्न से मध्यम: प्रश्न जालनुमा नहीं हैं। यदि आपने मुख्य तथ्यों को याद कर लिया है तो ये सीधे हैं। हालाँकि, इनमें शून्य अस्पष्टता चाहिए। यदि आप वन्यजीव अधिनियम के सटीक वर्ष (1972 बनाम 1980) को लेकर अस्पष्ट हैं, तो आप भ्रामक विकल्प के जाल में फंस जाएंगे। कठिनाई संख्याओं के घनत्व में है, संकल्पनात्मक जटिलता में नहीं।
5. बिहार-विशिष्टता के साथ मेल: गंगा डॉल्फिन प्रश्न सीधे बिहार की नदी पारिस्थितिकी से संबंधित है। कंवर झील रामसर स्थल (दिए गए PYQ में प्रत्यक्ष रूप से नहीं पूछा गया, परंतु आने की संभावना है) भी बिहार से जुड़ता है। हर प्रश्नपत्र में कम से कम एक प्रश्न की अपेक्षा करें जो किसी राष्ट्रीय पर्यावरणीय कानून को बिहार-विशिष्ट प्रजाति या स्थल से जोड़ता हो।
6. घरेलू और अंतरराष्ट्रीय के बीच विभाजन: सात PYQ में से तीन घरेलू भारतीय अधिनियमों (NGT अधिनियम, वन्यजीव अधिनियम अनुसूची, EPA वर्ष) के बारे में हैं, दो NGT अधिनियम (घरेलू) के बारे में हैं, एक रामसर (अंतरराष्ट्रीय) के बारे में है, और एक पेरिस समझौते (अंतरराष्ट्रीय) के बारे में है। यह घरेलू कानूनों के पक्ष में लगभग 70:30 का विभाजन सुझाता है। दोनों की तैयारी करें, परंतु अधिनियमों को प्राथमिकता दें।
और क्या पूछा जा सकता है
सात PYQ में देखे गए प्रतिमानों के आधार पर, हम भविष्य की BPSC परीक्षाओं के लिए निम्नलिखित कोणों का आत्मविश्वास से पूर्वानुमान लगा सकते हैं। प्रत्येक पूर्वानुमान किसी परखे गए PYQ पर आधारित है और तार्किक रूप से किसी निकटवर्ती अवधारणा तक विस्तारित होता है।
| संभावित प्रश्न कोण | यह संभावित क्यों है | तैयार करने योग्य मुख्य तथ्य |
|---|---|---|
| वन्यजीव अधिनियम की किस अनुसूची के तहत भारतीय बाघ संरक्षित है? | प्रश्न 2 में गंगा डॉल्फिन अनुसूची I पूछी गई। बाघ उसी अनुसूची की सबसे प्रतिष्ठित प्रजाति है। परीक्षक उसी अनुसूची से एक अलग प्रजाति पूछ सकता है। | बाघ अनुसूची I में है। यह भी जानें कि हाथी, गैंडा, हिम तेंदुआ और गंगा डॉल्फिन सभी अनुसूची I में हैं। |
| रामसर अभिसमय के तहत मोंत्रो रिकॉर्ड क्या है? | प्रश्न 5 में रामसर के पारिस्थितिकी तंत्र फोकस को पूछा गया। मोंत्रो रिकॉर्ड एक सुप्रसिद्ध तंत्र है जो रामसर को अन्य अभिसमयों से अलग करता है। यह अभी तक नहीं पूछा गया। | मोंत्रो रिकॉर्ड उन रामसर स्थलों को सूचीबद्ध करता है जहाँ पारिस्थितिक चरित्र खतरे में है। भारत के पास केवलादेव और चिल्का थे; चिल्का को हटाया गया। कंवर झील इस पर नहीं है। |
| राष्ट्रीय हरित अधिकरण को किन निकायों के आदेशों पर अपीलीय क्षेत्राधिकार प्राप्त है? | प्रश्न 1 और 4 में स्थापक अधिनियम पूछा गया। NGT की शक्तियों तक विस्तार स्वाभाविक है। NGT जल अधिनियम, वायु अधिनियम आदि के तहत CPCB, SPCB और राज्य सरकारों से अपीलें सुनता है। | NGT जल अधिनियम की धाराओं 28 और 29 तथा वायु अधिनियम की समान धाराओं के तहत CPCB और SPCB से अपीलें सुनता है। वन संरक्षण अधिनियम के तहत केंद्र सरकार के आदेशों से भी। |
| कौन-सा अंतरराष्ट्रीय अभिसमय गंगा डॉल्फिन जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों के व्यापार को विनियमित करता है? | प्रश्न 2 में वन्यजीव अधिनियम (घरेलू) के तहत संरक्षण पूछा गया। अंतरराष्ट्रीय समानांतर CITES है। गंगा डॉल्फिन CITES के परिशिष्ट I में सूचीबद्ध है। | CITES (1973)। परिशिष्ट I = सर्वाधिक लुप्तप्राय (व्यावसायिक व्यापार निषिद्ध)। परिशिष्ट II = व्यापार नियंत्रित। परिशिष्ट III = व्यापार निगरानी। |
| पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम भोपाल गैस त्रासदी के सापेक्ष किस वर्ष अधिनियमित हुआ? | प्रश्न 3 में वर्ष सीधे पूछा गया। एक अधिक सूक्ष्म प्रश्न पूछ सकता है: "कौन-सा पर्यावरणीय कानून भोपाल गैस त्रासदी का प्रत्यक्ष परिणाम था?" — उत्तर EPA, 1986। या पूछे: "किस अधिनियम ने सरकार को खतरनाक उद्योगों के लिए निर्देश जारी करने की शक्ति दी?" | EPA की धाराएँ 5, 6, 7। यह भी जानें कि सार्वजनिक देयता बीमा अधिनियम, 1991 और रासायनिक दुर्घटनाएँ (आपातकालीन योजना, तैयारी और प्रतिक्रिया) नियम, 1996 भी भोपाल के बाद बनाए गए। |
| वन्यजीव अधिनियम की कौन-सी अनुसूची संरक्षित पौधों को सूचीबद्ध करती है? | अनुसूची I-IV अत्यधिक परखी जाती हैं। अनुसूची VI (पौधे) कम परिचित है और पार्श्व विस्तार के रूप में आ सकती है। | अनुसूची VI में बेडोम साइकैड, ब्लू वंदा, पिचर प्लांट, और लाल चंदन जैसे पौधे शामिल हैं। |
| उत्सर्जन लक्ष्यों के संबंध में 'क्योटो प्रोटोकॉल' और 'पेरिस समझौते' में क्या अंतर है? | प्रश्न 6 में पेरिस समझौते का उद्देश्य पूछा गया। दोनों जलवायु संधियों के बीच अंतर परखने वाला तुलनात्मक प्रश्न बहुत संभावित है। | क्योटो में केवल विकसित देशों के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी लक्ष्य थे। पेरिस में सभी पक्षकारों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान हैं, तापमान लक्ष्यों के साथ। क्योटो की पहली प्रतिबद्धता अवधि 2012 में समाप्त हुई; पेरिस 2020 से लागू है। |
| कौन-सी बिहार आर्द्रभूमि रामसर स्थल है और इसे कब नामित किया गया था? | प्रश्न 5 में आर्द्रभूमियों पर रामसर का फोकस पूछा गया। बिहार की कंवर झील (कबरताल) राज्य-विशिष्ट प्रश्न के लिए एक स्वाभाविक उम्मीदवार है। | कंवर झील, बेगूसराय जिला। 2020 में रामसर स्थल घोषित। यह एक गोखुर झील है। यह भी जानें कि विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य (भागलपुर) रामसर स्थल नहीं बल्कि एक संरक्षित क्षेत्र है। |
सामान्य भूलें एवं जाल
अच्छी तरह तैयार अभ्यर्थी भी इन विशिष्ट जालों में फंस जाते हैं। अंक गँवाने से बचने के लिए इन्हें अभी पहचान लें।
- NGT अधिनियम को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम से भ्रमित करना: NGT EPA के तहत स्थापित नहीं है। NGT अधिनियम 2010 का एक अलग, स्वतंत्र अधिनियम है। कई विद्यार्थी मान लेते हैं कि "छत्र कानून" का अर्थ है "सब कुछ सृजित करता है।" परीक्षक इसी सटीक भ्रम को परखता है।
- यह सोचना कि गंगा डॉल्फिन अनुसूची II में है: कुछ अभ्यर्थी याद रखते हैं कि "अनुसूची I बाघों और हाथियों के लिए है" और मान लेते हैं कि डॉल्फिन "कम महत्वपूर्ण" है। वास्तव में, डॉल्फिन भी अनुसूची I में है। सदैव "गंभीर रूप से लुप्तप्राय" को अनुसूची I से जोड़ें।
- वन्यजीव अधिनियम के वर्ष को मिलाना: 1972 सही वर्ष है। भ्रामक विकल्पों में अक्सर 1965, 1980, 1991 शामिल होते हैं। याद रखें कि वन्यजीव अधिनियम स्टॉकहोम सम्मेलन (1972) के समान वर्ष में पारित हुआ था।
- यह विश्वास करना कि पेरिस समझौता "2030 तक उत्सर्जन को समाप्त करता है": यह मीडिया में एक सामान्य अतिशयोक्ति है। समझौते का उद्देश्य तापमान सीमा है, तत्काल उत्सर्जन समाप्ति नहीं। भारत का घोषित शुद्ध-शून्य लक्ष्य 2070 है।
- रामसर को अन्य अभिसमयों से भ्रमित करना: रामसर = आर्द्रभूमि। इसे CBD (जैव विविधता), CITES (व्यापार), UNFCCC (जलवायु), या मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (ओज़ोन) के साथ भ्रमित न करें। पूरा नाम "आर्द्रभूमियों पर अभिसमय..." सबसे आसान संकेत है।
- यह मान लेना कि जल अधिनियम भूजल को कवर करता है: जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 मुख्यतः सतही जल (नदियाँ, धाराएँ, झीलें) को कवर करता है। भूजल प्रदूषण EPA और भूजल (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2015 (मसौदा) के तहत विनियमित है।
- यह भूल जाना कि गंगा डॉल्फिन CITES की अनुसूची I और परिशिष्ट I दोनों के तहत संरक्षित है: यदि प्रश्न "अंतरराष्ट्रीय संरक्षण" पूछे, तो उत्तर CITES परिशिष्ट I है; यदि घरेलू, तो उत्तर वन्यजीव अधिनियम अनुसूची I है। प्रश्न को ध्यान से पढ़ें।
- वायु अधिनियम में ध्वनि प्रदूषण के समावेश को मिलाना: वायु अधिनियम में 1987 का संशोधन ध्वनि को शामिल करता है। परंतु कुछ लोग सोचते हैं कि ध्वनि एक अलग "ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000" के तहत है, जो मौजूद तो हैं परंतु EPA के तहत बनाए गए हैं, किसी अलग अधिनियम के तहत नहीं। ध्वनि विनियमन का मूल अधिनियम वायु अधिनियम (मानकों के लिए) और EPA (नियमों के लिए) है।
स्मृति सहायक एवं स्मरणीय युक्तियाँ
सर्वाधिक परखे जाने वाले क्रमों को दृढ़ करने के लिए इन दो युक्तियों का प्रयोग करें।
स्मरणीय युक्ति 1: भारत के प्रमुख पर्यावरणीय कानूनों के कालक्रम के लिए "वन-जल-वायु-पर्या-हरित" श्रृंखला
नाम: "वन-जल-वायु-पर्या-हरित" शृंखला
स्मरणीय वाक्य: वन्यजीव (1972) → जल (1974) → वायु (1981) → पर्यावरण (1986) → हरित अधिकरण (2010)
इसे एक कहानी के रूप में याद रखें: "बहत्तर में वन्यजीव बड़ा हुआ; चौहत्तर में जल को कानून मिला; इक्यासी में वायु के नियम शुरू हुए; छियासी में पर्यावरण संवरा; दस (2010) में हरित अधिकरण आया।"
यह क्या खोलता है: अधिनियमों का क्रम और उनके सही वर्ष। इससे वायु अधिनियम (1981) को पर्यावरण अधिनियम (1986) के साथ, या जल अधिनियम (1974) को वन्यजीव अधिनियम (1972) के साथ भ्रमित करने से बचा जा सकता है।
हल किया गया उदाहरण: प्रश्न 3 पूछता है: "पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम किस वर्ष अधिनियमित हुआ?" स्मरणीय युक्ति का प्रयोग करते हुए, आप कहते हैं "छियासी" क्योंकि पर्यावरण वायु (81) के बाद क्रम में चौथे स्थान पर आता है। आप इसे 1981 से भ्रमित नहीं करते।
स्मरणीय युक्ति 2: वन्यजीव अधिनियम अनुसूची I प्रजातियों के लिए "गंगा का सबसे बड़ा खजाना"
नाम: "गंगा का सबसे बड़ा खजाना" स्मृति-शृंखला
स्मरणीय कथा: कल्पना करें कि गंगा नदी में एक "सबसे बड़ा खजाना" है, जिसे पाँच सबसे प्रतिष्ठित जीव पहरा दे रहे हैं—ये सभी वन्यजीव अधिनियम की अनुसूची I में हैं:
- गंगा डॉल्फिन (राष्ट्रीय जलीय प्राणी, बिहार का गौरव)
- बाघ
- हाथी
- गैंडा (एक सींग वाला)
- हिम तेंदुआ
छोटा वाक्य बनाएं: "गंगा में बाघ, हाथी, गैंडा और हिम तेंदुआ—सब अनुसूची I के पाँच रत्न हैं।"
यह क्या खोलता है: BPSC के गंगा डॉल्फिन अनुसूची वाले प्रश्न के लिए, आप तुरंत जान जाते हैं कि यह सर्वोच्च प्राथमिकता (अनुसूची I) है। यह तब भी मदद करता है जब प्रश्न अनुसूची I की किसी अन्य प्रजाति के बारे में पूछे—बस इन पाँच रत्नों को याद करें।
हल किया गया उदाहरण: प्रश्न 2 गंगा डॉल्फिन की अनुसूची पूछता है। "अनुसूची I = सर्वाधिक संरक्षित = गंगा डॉल्फिन सर्वोच्च प्राथमिकता" का प्रयोग करते हुए, आप उत्तर को दृढ़ता से पकड़ते हैं।
त्वरित पुनरावृत्ति
परिचय
- पर्यावरणीय कानून और अभिसमय BPSC में वर्ष, अनुसूची और उद्देश्य के बारे में तथ्यात्मक प्रश्नों के साथ सीधे परखे जाते हैं।
- 7 PYQ दिए गए: 5 घरेलू अधिनियमों (NGT, वन्यजीव, EPA) पर, 2 अंतरराष्ट्रीय अभिसमयों (रामसर, पेरिस) पर।
- बिहार-विशिष्ट फोकस: गंगा डॉल्फिन (अनुसूची I) और कंवर झील (रामसर स्थल)।
मूल अवधारणाएँ एवं आधार
- पर्यावरण को EPA, 1986 के तहत व्यापक रूप से परिभाषित किया गया है।
- सावधानी सिद्धांत और प्रदूषक भुगतान सिद्धांत NGT अधिनियम, 2010 (धारा 20) में सन्निहित हैं।
- संवैधानिक आधार: 42वें संशोधन, 1976 द्वारा जोड़े गए अनुच्छेद 48A (राज्य का कर्तव्य) और 51A(g) (नागरिक का कर्तव्य)।
- अधिनियम, नियम, अभिसमय, संधि, प्रोटोकॉल के बीच अंतर करें।
भारत में प्रमुख पर्यावरणीय कानून
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: 6 अनुसूचियाँ; अनुसूची I (उच्चतम संरक्षण)–गंगा डॉल्फिन, बाघ, हाथी।
- जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974: CPCB व SPCB; सतही जल को कवर करता है।
- वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981: 1987 संशोधन ने ध्वनि प्रदूषण को वायु प्रदूषक के रूप में जोड़ा।
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986: भोपाल के बाद छत्र विधान; सरकार को मानक निर्धारित करने, निर्देश जारी करने का अधिकार देता है।
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010: NGT का सृजन करने वाला स्वतंत्र अधिनियम; सावधानी और प्रदूषक भुगतान सिद्धांतों को लागू करता है।
अंतरराष्ट्रीय अभिसमय
- रामसर अभिसमय, 1971: अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियाँ; भारत में कंवर झील (बिहार) सहित 80+ रामसर स्थल हैं।
- पेरिस समझौता, 2015: वार्मिंग को 2°C से काफी नीचे सीमित करना, 1.5°C का प्रयास; राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान; भारत ने अनुसमर्थित किया।
हल किए गए उदाहरण
- NGT की स्थापना NGT अधिनियम, 2010 के तहत हुई (EPA के तहत नहीं)।
- गंगा डॉल्फिन वन्यजीव अधिनियम की अनुसूची I में है।
- भोपाल गैस त्रासदी के बाद 1986 में EPA अधिनियमित हुआ।
- रामसर अभिसमय आर्द्रभूमियों को कवर करता है।
- पेरिस समझौते का प्राथमिक उद्देश्य: तापमान वृद्धि को 2°C से काफी नीचे सीमित करना।
PYQ रुझान एवं प्रतिमान
- तथ्यात्मक स्मरण प्रधान है: वर्ष, अनुसूचियाँ, सटीक अधिनियम नाम।
- NGT और वन्यजीव अनुसूची I की बार-बार परख।
- भ्रामक विकल्प प्रशंसनीय निकटवर्ती कानून होते हैं।
- बिहार-विशिष्ट संबंध सामान्य है।
और क्या पूछा जा सकता है
- पूर्वानुमान तालिका: बाघ की अनुसूची, मोंत्रो रिकॉर्ड, NGT अपीलीय क्षेत्राधिकार, CITES बनाम वन्यजीव अधिनियम, EPA बनाम भोपाल-पश्चात अधिनियम, अनुसूची VI पौधे, क्योटो बनाम पेरिस, कंवर झील नामांकन।
सामान्य भूलें एवं जाल
- NGT अधिनियम को EPA से भ्रमित करना।
- यह सोचना कि गंगा डॉल्फिन अनुसूची II में है।
- वन्यजीव अधिनियम के वर्ष को गलत याद करना (1972, न कि 1980)।
- यह विश्वास करना कि पेरिस समझौता 2030 तक उत्सर्जन समाप्त करता है।
- रामसर को CITES/UNFCCC के साथ मिलाना।
- यह मान लेना कि जल अधिनियम भूजल को कवर करता है।
- यह भूल जाना कि वायु अधिनियम में ध्वनि प्रदूषण शामिल है।
स्मृति सहायक एवं स्मरणीय युक्तियाँ
- "वन-जल-वायु-पर्या-हरित" क्रम: वन्यजीव (1972), जल (1974), वायु (1981), पर्यावरण (1986), NGT (2010)।
- "गंगा का सबसे बड़ा खजाना" अनुसूची I प्रजातियों के लिए: गंगा डॉल्फिन, बाघ, हाथी, गैंडा, हिम तेंदुआ—बिहार की गंगा में इन पाँच रत्नों को अनुसूची I में याद रखें।